Thursday, 3 December 2015



#सहिष्णु# का विलोम(Opposite)....#असहिष्णु#....ठीक किसी नदी की धारा के विपरीत धारा...#Intolerance#.... #GOD#....#G-Generator....सृष्टि का निर्माण...ब्रहम-देव 'ब्रह्मा जी'....#O-Operator....सृष्टि के संचालक....नारायण 'श्री विष्णु'.....और अंत में #D-Destroyer....मात्र अति का अंत तथा मति (बुद्धि) का 'श्रीं गणेश'....देवो के देव....'महादेव'....स्वयं के नाथ है या नहीं परन्तु नाम..."भोले-नाथ"...."स्वयंभू"....बड़े आदमी अलग-अलग परिवेश में विभिन्न आवास....परन्तु मानसरोवर का युग्म बनने हेतु....शम्भू गए कैलाश....'कैलाश-मानसरोवर'....अब सम्पूर्ण सृष्टि का भार ‘श्री हरी’ के पास....विष्णु....संचालक या प्रचालक.....TOTAL OPERATION…..चाणक्य-नीति तथा विदुर-नीति का सुदृढ़ सामंजस्य......साम, दाम, दण्ड, भेद.....पूर्ण रूपेण सहिष्णु प्रशासन.....शायद इसीलिए विष्णु नाम सार्थक....आग्रहपूर्वक आदेश या सविनय अवज्ञा......मूल्यों का हास् या क्षय कदापि नहीं....क्षमा, रक्षा, न्याय, व्यवस्था.....विधि का विधान....सम्पूर्ण ‘विधायक-चिंतन”......न उत्पत्ति, न संहार......बस उचित परवरिश.....न जीत का लालच, न हार का डर.....’हरी करे सो खरी’....’नर ही नारायण’....हरी कथा अनंता.....शिखर-दर्शन हो या गर्भ-गृह.....समान आस्था तथा श्रध्दा.....सहज श्री विष्णु समान ख्यात हस्तियों का जीवन बयान करता है कि सर्वाधिक सुरक्षित वह भी आध्यात्मिक दृष्टि से मात्र #भारत-देश# हो सकता है.....सामान्य-पहलु....हर व्यक्ति मात्र साधारण ही हो सकता है....परन्तु किये गए प्रयास या कार्य से वह असाधारण कहला सकता है....सम्मान की धारा....यत्र-तत्र-सर्वत्र.....Ordinary may be Extra-Ordinary…..Just due to mind…..सिर्फ मस्तिष्क की विचार-धारा.....और यदि असहिष्णुता (INTOLERANCE) की चर्चा होती है तो अन्त में मस्तिष्क का यही निर्णय हो सकता है कि.....#Wait is Over#….COME-HOME…..&…..Come-Soon....मात्र आश्रय प्रदान करने का आशय....भय हरगिज नहीं....रूठने-मनाने के साथ मान-मनवार का संस्कार भारत-राष्ट्र की शान है....परन्तु सिर्फ रूठने की व्याधि को हठधर्मिता कहा जा सकता है...भारत-वर्षने सदैव अन्तराष्ट्रीय जगत को कहा है...#”पधारो म्हारे देश”#...पूर्ण सुरक्षित....धर्म-निरपेक्ष....Service Before Self…..अपनों से अधिक पराये को प्यार....अंतर्राष्ट्रीय-स्तर पर यही छवि....यह हम नहीं राष्ट्र-भक्ति कहती है.....#मेरा भारत महान#.....सम्पूर्ण संविधान का विधान पूर्ण-रूपेण सहिष्णु..... अनेकता में एकता....अनेक मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, चर्च.....प्रत्येक का ससम्मान सर्वत्र स्वागत.....’स्वतंत्रता’ प्रतिबंधन से पूर्ण मुक्त....’समस्त सम्प्रदाय से सम्बन्धित सर्वाधिक स्तुति-स्थल’...सम्पूर्ण विश्व मानो भारत-वर्ष में बसा हो....यह विशेषता कहीं ओर, भला कहाँ ?......सर्वाधिक विभिन्न प्रार्थना-स्थल....सर्वाधिक आस्था तथा श्रद्धा.....हर उत्सव में उत्साह और उल्लास.....हर गूंज में राष्ट्र की पुकार....’#मेरा भारत महान#’.....तत्पश्चात तो गणनाये यही बयां करती है कि #सत्य मेव जयते#.....तब तो #INTOLERANCE#…..असहिष्णुता.....मात्र मिथ्या सिद्ध हो सकती है....हार्दिक स्वागतम....’विनायक समाधान’....#vinayaksamadhan#@#9165418344#...(INDORE+UJJAIN+DEWAS)....#vinayaksamadhan#....जय हो...सादर नमन...Regards#









Vinayak Samadhan: #‎राम‬-राम सा#....यही है 'विनायक-योग'.....‪#‎गूढ़‬...

Vinayak Samadhan: #‎राम‬-राम सा#....यही है 'विनायक-योग'.....‪#‎गूढ़‬...: #‎ राम‬ -राम सा#....यही है 'विनायक-योग'..... ‪#‎ गूढ़‬ रहस्य#…..’आमने-सामने’ एक दुसरे को “राम-राम” कहने के लिए... ‪#‎ शत‬ -प्रतिशत...
#‎राम‬-राम सा#....यही है 'विनायक-योग'.....‪#‎गूढ़‬ रहस्य#…..’आमने-सामने’ एक दुसरे को “राम-राम” कहने के लिए...‪#‎शत‬-प्रतिशत सहिष्णु#....‪#‎INTOLERANCE‬# या ‪#‎असहिष्णुता‬#.....कदापि नहीं#...... मात्र ‪#‎आनन्द‬#....‪#‎समापन‬ में तापमान सामान्य#....मात्र आनन्द की जानकारी....वैसे तो दो लोगो में आमने-सामने का सम्बोधन "राम-राम" होता है परन्तु सम्बोधन के साथ सम्मान हेतु 'राम-राम सा' भी कहा जाता है...विशेषतः ग्रामीण परिवेश में...वैसे तो अन्य सम्बोधन भी लोकप्रियता के दायरे में हो सकते है, परन्तु ‘राम-राम’ का जवाब भी ‘राम-राम’ से अतिशीघ्र आता है...बहुत आसान...‘दो और दो चार’ या ‘दो दुनी चार’ या ‘आँखे-चार’....”सत्संग ही श्रेष्ठ अचार”....स्वाभाविक अनिवार्य रूप से....बाध्यता किञ्चित नहीं...कदापि नहीं....WHY ???....क्यों यह संस्कार इतना सहज प्रचलित है ?....आओ इसका पता लगाये....विषय-'धर्म-विज्ञान'....पाठ-एक....आखिर क्यों कहते है सब ?....कि "राम से बड़ा राम का नाम"... ."राम की चिड़ियाँ, राम का खेत"....शब्दों के खेत में शब्दों की चिड़ियाँ...यह कहावत निरर्थक कि....'चिड़ियाँ चुग गयी खेत, अब का होत'....दूर-दूर तक पश्चाताप नहीं....चारो और गर्व ही गर्व....शायद यही है..."ONE MAN ARMY"....'यथा बीजम् तथा निष्पत्ति'....जाहे विधि राखे राम, ताहे विधि रहिये....”राम-राम” कहिये जी, “राम-राम” कहिये...क्या कभी सोचा है कि बहुत से लोग जब एक दूसरे से मिलते हैं तो आपस में एक दूसरे को दो बार ही “राम-राम" क्यों बोलते हैं ?.....एक बार या तीन बार क्यों नही बोलते ?.....दो बार “राम राम" बोलने के पीछे बड़ा गूढ़ रहस्य…...वह भी आदि काल से......आइये जरा-सा अध्ययन करते है.....हिन्दी की शब्दावली में.....‘र' २७(27th) वां शब्द है....‘आ’ की मात्रा २ दूसरा(2nd).....‘म' २५ वां(25th) शब्द है.....अब तीनो अंको का योग करें तो (२७+२+२५=५४) अर्थात एक “राम” का योग ५४ हुआ…..इसी प्रकार दो “राम-राम” का कुल योग १०८ होगा....हम जब कोई जाप करते हैं तो १०८ मनके की माला गिनकर करते हैं क्योंकि १०८ बार जाप करना हमारे धर्म, संस्कृति और पुराणों मे पवित्र कहा गया है....अत: जब हम दो बार “राम-राम” का उच्चारण करते हैं तो हमें १०८ मनके की माला जपनें जैसा पुण्य प्राप्त होता है….अब वैदिक गणित...अंक नौ(9-NINE)...सिद्ध-पूर्णांक....अक्षय अर्थात विनायक-अंक माना जाता है....(54=5+4=9)....(108=1+0+8=9)...(1008=1+0+0+8=9).....साधारण तथ्य--''जो उर्जा को जागृत करे"...वही कहलाता है--"अतिविशिष्ट"....प्रार्थना के शब्दों का एक-मात्र उदगम-स्थल....मात्र अध्ययन...अध्ययन के अनेक अंग....सबका एक ही रंग....मात्र, सिर्फ, केवल, Only..."सत्संग"...जहाँ और कुछ नहीं हो सकता है, बस...."ईश्वर की उपस्तिथि का अहसास होता है"...चिरस्थायी, अक्षय, विराट...मात्र आनंद को सफल तथा सुफल बनाने के लिये...यही है 'विनायक-योग'.....’आमने-सामने’ एक दुसरे को “राम-राम” कहने के लिए.....ठीक जैसे उत्तम 'वैदिक-योग'....सम्पूर्ण चर्चा का "संपर्क-सूत्र'..."विनायक-सूत्र"...."91654-18344"...'9+1+6+5+4+1+8+3+4+4'='45'="9" अर्थात सहज अक्षय समीकरण....इस समीकरण में सम्पूर्ण अंक-शास्त्र सिर्फ तीन अंक गायब है.....0, 2, 7... और (0+2+7=9)....जो अप्रत्यक्ष है, वही प्रत्यक्ष है....यह बात अलग है कि दोनों को जानने के लिए समीकरण हल करना अनिवार्य है...सात्विक तथा सहज परिश्रम...'विनायक-परिश्रम'....हार्दिक स्वागतम @ 91654-18344...INDORE+UJJAIN+DEWAS....‪#‎vinayaksamadhan‬#....जय हो...सादर नमन...Regards#.....




Tuesday, 1 December 2015

Vinayak Samadhan:
#शत-प्रतिशत सहिष्णु#.....#UNIVERSAL #BREAKING#-#NEWS#.... #INTOLERANCE या असहिष्णुता कदापि नहीं#....सहज श्री विष्णु समान ख्यात हस्तियों का जीवन बयान करता है कि सर्वाधिक सुरक्षित वह भी आध्यात्मिक दृष्टि से मात्र #भारत-देश# हो सकता है.....सामान्य-पहलु....हर व्यक्ति मात्र साधारण ही हो सकता है....परन्तु किये गए प्रयास या कार्य से वह असाधारण कहला सकता है....सम्मान की धारा....यत्र-तत्र-सर्वत्र.....Ordinary may be Extra-Ordinary…..Just due to mind…..सिर्फ मस्तिष्क की विचार-धारा.....और यदि असहिष्णुता (INTOLERANCE) की चर्चा होती है तो अन्त में मस्तिष्क का यही निर्णय हो सकता है कि.....#Wait is Over#….COME-HOME…..&…..Come-Soon....मात्र आश्रय प्रदान करने का आशय....भय हरगिज नहीं....रूठने-मनाने के साथ मान-मनवार का संस्कार भारत-राष्ट्र की शान है....परन्तु सिर्फ रूठने की व्याधि को हठधर्मिता कहा जा सकता है...भारत-वर्षने सदैव अन्तराष्ट्रीय जगत को कहा है...#”पधारो म्हारे देश”#...पूर्ण सुरक्षित....धर्म-निरपेक्ष....Service Before Self…..अपनों से अधिक पराये को प्यार....अंतर्राष्ट्रीय-स्तर पर यही छवि....यह हम नहीं राष्ट्र-भक्ति कहती है.....#मेरा भारत महान#.....सम्पूर्ण संविधान का विधान पूर्ण-रूपेण सहिष्णु.....मौसम के कारण जुकाम को कोई भी चिकित्सक सामान्य ही मानेगा....गहन चिकित्सा केंद्रया #ICU# के बारे बार-बार चर्चा करना चिकित्सक के अनुसार भी उचित नहीं....और प्रत्येक चिकित्सा का एक सिद्धांत....#Healthy Start Of Every Day#....और संतुष्टि या सफलता का मूल-सिद्धांत....#अन्त भला तो सब भला#....अंदाज़ और आगाज़ में लय-ताल को #सुर-संगम# के रूप में जाना जाता है....दीवारों में दरारों की मरम्मत के बाद रंग-रोगन संतुष्टि के लिए आवश्यक है, दरारे कमजोरी बयान करती है, शायद इसीलिये #मजबूती# का महत्व बना रहेगा.....और स्वयं के घर की बात होती है तो सहज #स्वर्ग से सुन्दर#.....और सुन्दरता मन की हो या चेहरे की....एक #(LOGO-प्रतीक चिन्ह)# अवश्य लागु होता है....और इसी आधार पर एक (LOGBOOK-रोज़नामचा) कायम होना संभव है....तब लोग क्या कहते है ?...कोई फर्क नहीं पड़ता, परन्तु #मन की बात# हो तो सक्रियता का नृत्य सिर्फ सुर-संगम के साथ ही संभव है....श्रवण, किर्तन, चिंतन, मनन सतत प्रवाहमान.....#विनायक-आनन्द#.....प्रारंभ से मध्य तक और मध्य से समापन तक....#आनन्द#....#समापन में तापमान सामान्य#......LOGO हो, या LOGBOOK.....#सत्यम-शिवम्-सुन्दरम्# OR #सत्यमेव जयते#......तब तो INTOLERANCE…..असहिष्णुता.....मात्र मिथ्या सिद्ध हो सकती है....ख्यात हस्तियों का जीवन बयां करता है कि सर्वाधिक सुरक्षित वह भी आध्यात्मिक दृष्टि से मात्र भारत देश हो सकता है....#BE INDIAN, BUY INDIAN#....जय हो....सादर नमन...समस्त स्वतंत्र-अवसर, प्रश्नों पर आधारित हो सकते है  और प्रश्न करने का स्वतंत्र-अवसर होना चाहिए......सादर नमन्...जय हो..."विनायक-चर्चा" हेतु हार्दिक स्वागत....#विनायक-समाधान @ 91654-18344....(INDORE/UJJAIN/DEWAS)#.