Wednesday, 2 November 2016

चायना-बाजार मे भारतीय-भगवान...थोक-भाव मे...सस्ते मे....मंजूर है....किन्तु यह शर्त भारतीय परम्परा की विधा नही कि...USE & THROW....quickly & suddenly...खरीदने के दौरान हम जानते है कि इस चीज को कभी भी फेंकना पड़ सकता है...बेचने वाला भी मित्रता नहीं निभा सकता है...टिकाऊ चीज सिर्फ भारत में बन सकती है...आमने-सामने....सिर्फ एक कारीगर साधारण मिट्टी से मनचाही आकृति दे सकता है...तब कलाकार की फैक्ट्री मे नुकसान असम्भव...और यही मिट्टी पुनः समेटने के लिये....फेकने के लिये नही...आम और गुठली दोनो काम की चीज....सनातन सम्प्रदाय में शरीर को मिट्टी का माना गया है....सहन-शक्ति मे वृद्धि भारतीय-संस्कृति की विशेषता हो सकती है...संपूर्ण दुनिया मे लोकप्रिय....भारतीय-विवाह की एक ही खासियत है...."मन्ज़ूर"..."FOREVER"....throughout....ठेठ से लेकर ठेठ तक...शब्दकोश मे इस शब्द का अध्ययन आवश्यक है...पर्यायवाची की सहायता से भी विकल्प सम्भव नही...तब गवाही मे विनायक-श्री सबसे किफायती...सिर्फ सुपारी को श्री गणेश के समकक्ष स्थापित कर सिर्फ एक मन्त्र बोल दिया जाता है....ॐ श्री गणेशाय नमः।।....और शादी का लड्डू खाने के लिए प्रसाद मे लड्डू चढ़ा दिए जाते है...पछताने की बात नही...मौका सबको मिलता है.....जैसे दिवाली पर दिये जलाये जाते है...इस बार तो मिट्टी के दिये की आवक और बिक्री दोनो...."बम्पर"...और संस्कार इस बात का पक्ष लेते हुए कहते है....हम-तुम सनम, मिलते रहे....सातों जनम....जैसे संतान अपने माता-पिता की अगले जन्म में भी कल्पना करती है...बैंड-बाजा-बारात का काम नही....पंडित और शहनाई की बात नही....क्या आपने भगवान को देखा है ?...जब किसी साधक से यह प्रश्न किया जाता है तो साधक गुरु की और ऊँगली उठा देता है...जैसे भीड़ मे गुम हो चुके बच्चे को अनेक फोटो दिखाने पर वह माता-पिता के सामने ऊँगली से इशारा कर देता है....बन्दुक उठाने की बात पर...ऊँगली उठाने की बात पर...बाजीराव की तलवार ही भली....कलाकार अपनी कला मे भगवान के दर्शन कर लेता है....आस्था कहती है, इंसान के श्री-मुख से...सरवटे बस स्टेण्ड के एक सेठ...माँ शारदा के साधक....मरीमाता के सेठ पर....माँ बाणेश्वरी का वरद-हस्त...गाड़ी के कागजात किसी के भी नाम हो....गाड़ी पर तो माँ का ही नाम होगा...और इनकी सेवाओं से हम कह सकते है....हम इंदौर में है...आनन्द के लिये हम सम्पुर्ण सर्च इंजिन को खंगाल सकते है....तब यह आध्यात्मिक विषय बन जाता है...you may search into Google....just say "vinayak samadhan".....बातों-बातों में....खेल-खेल मे....चलते-फिरते....
आदमी के पास गायब होने की शक्ति आ जावे और इस पावर से वह क्या करना चाहेगा ?...इस बात को अगर लिखित में ले लिया जावे तो मनुष्य की बुद्धि का आकलन हास्यास्पद हो सकता है...लीगल तौर पर एक भी काम ऐसा सिद्ध नही होता है कि जिसको अप्रत्यक्ष करने की आवश्यकता हो...संपूर्ण विश्व मे.....पुराण, शास्त्र, उपनिषद, ग्रन्थ....इसलिये महान और पवित्र माने जा सकते है कि उनमे अच्छी बातें लिखी है....आदमी भी वही होता है जिसकी बाते अच्छी होती है.....और अच्छा आचरण प्राप्त करने के लिये आदमी को अच्छा साहित्य पढ़ना पड़ता है... किसी चीज को वहाँ ढूँढना, जहाँ वह नही है....यह मन की अज्ञानता हो सकती है....खुद के गायब होने की ताकत से भी चीज नही मिलेगी...और किसी बात को वहाँ बोलना, जहाँ वह आवश्यक नही....इस बात मे मन साक्षात् गवाह होता है...जैसे सामुन्द्रिक विज्ञान मे ज्ञानेन्द्रियों की गवाही होती है...महत्वकांक्षि लोगो की आवश्यकता की पूर्ति के लिये ज्योतिष शास्त्र का आविष्कार किया....स्वच्छता किसकी जवाबदारी है ?...जो गंदगी करे उसकी जवाबदारी....और मदद मिले तो हर किसी की....और यदि प्रोत्साहन मिले तो प्रत्येक की...
आपस का शगल....जलपान, स्तनपान, मद्यपान, धूम्रपान....जलपान रोज़मर्रा की घटना..व्यवहार बढ़ाने का रास्ता....स्तनपान जैसे अमृत-पान....हर स्तनधारी को वरदान....मद्यपान जहाँ मद्य वहीँ मयखाना...जो बोतल में जिंदगी ढूंढने जाता है, वहीँ कैद हो जाता है...धूम्रपान छोटी हरकत....कब लत लग जाती है ?...पता ही नहीं लगता....किन्तु सम्पूर्ण वायुमंडल को अशुद्ध करे....तब विषपान की संज्ञा भी विचारणीय....जैसे एक मछली सारे तालाब को मलिन करती है....जैसे एक चिंगारी पुरे फटाकों की फैक्ट्री को लपेट में ले लेती है....वैसे तो ज़माना ज्वलनशील !!....सामने वाले की समृद्धि देख कर खुद की हालत पर भड़कने की प्रवृत्ति मे निरन्तर वृद्धि.....पर जो चीज प्रकृति ने मानव को सिर्फ एक ही दी है, वह खरीद कर डबल करना मुश्किल है....बस दिमाग की ताकत डबल हो सकती है....वह भी मांग कर या खरीद कर नहीं....सिर्फ स्वयं के ध्यान के आधार पर...हम क्या करने जा रहे है ?...इस प्रश्न का उत्तर दिमाग में भली-भांति जमा होता है....हिसाब देने में सोचने का काम दिमाग का....नक्शा ठीक हो तो ईमारत भी बुलन्द हो सकती है....जैसे वर्दी की पहचान मजबूत होती है....ऊँगली उठाने की बात तो दूर बल्कि बुरी नजर का मुँहतोड़ जवाब हाजिर....हाथो-हाथ...बाउंड्री और बार्डर में अंतर.....गेंद बाउंड्री के पार चली जाये तो तालियों की आवाज़....दुश्मन बार्डर के अंदर आ जाये तो बन्दुक की आवाज़...और राष्ट्र की एक ही पुकार....आवाज़ दो, हम एक है...आदमी अपनी ताकत को, अपने आस पास के लोगो को दबा कर बढ़ाना चाहता है तो यह बहुत बड़ी भूल हो सकती है....विश्वसनीयता के ढेर में विश्वासघात की चिंगारी घातक सिद्ध होती है...वाही-वाही में चार-लोग हो, या चालीस-लोग....इस प्रक्रिया में खुद की ताकत बढ़ती नजर आती है....किन्तु आँख मसल कर या च्यूटी खीच कर देखना जरूरी है कि कहीं यह सपना तो नही ?...आलोचना...चार करे या चालीस....सपने नही आते बल्कि असलियत सामने आ जाती है.
शानदार और सरल में अंतर क्या ?....फाइव-स्टार और राम-निवास भोजनालय....या फिर भोले का चाय का ठेला...सिर्फ अपने एरिया में.....खुद का वजूद कायम करने के लिये....गुंडा-गर्दी मे जान से मारने की धमकी दी जाती है....यह जानते हुये कि दफा 302 की सजा मुकर्रर...और यह भी भली-भांति जानकारी चौकस कि यह सजा सैनिक को माफ़....बस एक शर्त कि अपने क्षेत्र मे, अपनी सुरक्षा के लिये....confidence यदि over हो जाये तो पार्टनर भी इकलौता मालिक बनने की राह पकड़ लेता है...और उसके जेहन से मित्रता का पहलु गायब हो जाता है...तब आदमी के पास गायब होने की शक्ति आ जावे और इस पावर से वह क्या करना चाहेगा ?...इस बात को अगर लिखित में ले लिया जावे तो मनुष्य की बुद्धि का आकलन हास्यास्पद हो सकता है...लीगल तौर पर एक भी काम ऐसा सिद्ध नही होता है कि जिसको अप्रत्यक्ष करने की आवश्यकता हो...संपूर्ण विश्व मे.....पुराण, शास्त्र, उपनिषद, ग्रन्थ....इसलिये महान और पवित्र माने जा सकते है कि उनमे अच्छी बातें लिखी है....आदमी भी वही होता है जिसकी बाते अच्छी होती है.....और अच्छा आचरण प्राप्त करने के लिये आदमी को अच्छा साहित्य पढ़ना पड़ता है... किसी चीज को वहाँ ढूँढना, जहाँ वह नही है....यह मन की अज्ञानता हो सकती है....खुद के गायब होने की ताकत से भी चीज नही मिलेगी...और किसी बात को वहाँ बोलना, जहाँ वह आवश्यक नही....इस बात मे मन साक्षात् गवाह होता है...जैसे सामुन्द्रिक विज्ञान मे ज्ञानेन्द्रियों की गवाही होती है...महत्वकांक्षि लोगो की आवश्यकता की पूर्ति के लिये ज्योतिष शास्त्र का आविष्कार किया....स्वच्छता किसकी जवाबदारी है ?...जो गंदगी करे उसकी जवाबदारी....और मदद मिले तो हर किसी की....और यदि प्रोत्साहन मिले तो प्रत्येक की....नीम का तैल सर्वश्रेष्ठ रोग-प्रतिरोधक....कितने लोग इस्तेमाल करते है ?....जैसे तुलसी के पत्ते....हर वनस्पति औषधि का काम करती है....ये हमसे बात करे या ना करे...हम कोशिश जरूर करते है....अनुभव की पाठशाला में जो पाठ सीखे जाते हैं, वे पुस्तकों और विश्वविद्यालयों मे नहीं मिलते….
..आशा करते है कि आपके समस्त कार्य सुचारू रूप से संचालित होते रहे....फुर्सत के क्षणों में शब्दों का आदान-प्रदान अर्थात चर्चा का योग, समय अनुसार.....उच्च, समकक्ष या मध्यम....शुद्ध रूप से....स्वयं का निर्णय हो सकता है...आमने-सामने...face to face...शब्दों का सम्मान...पूर्ण स्वतंत्रता के साथ...आनन्द के लिये हम सम्पुर्ण सर्च इंजिन को खंगाल सकते है....तब यह आध्यात्मिक विषय बन जाता है...you may search into Google....just say "vinayak samadhan".....बातों-बातों में....खेल-खेल मे....चलते-फिरते....सादर नमन्...जय हो..."विनायक-चर्चा" हेतु हार्दिक स्वागत....विनायक समाधान @ 91654-18344...INDORE/UJJAIN/DEWAS..

Vinayak Samadhan: कैरम खेलने की बात नही...स्ट्राइकर से निशाने वाली ब...

Vinayak Samadhan: कैरम खेलने की बात नही...स्ट्राइकर से निशाने वाली ब...: कैरम खेलने की बात नही...स्ट्राइकर से निशाने वाली बात को ले कर बवाल नही....और सारा हंगामा बरपाने की वजह कहीं व्यर्थ तो नही ?...सर्जिकल तो ...

Vinayak Samadhan: .जय गजानन्द, सदा रहे आनन्द.... आदि देव जय-जय गणना...

Vinayak Samadhan: .जय गजानन्द, सदा रहे आनन्द....
आदि देव जय-जय गणना...
: .जय गजानन्द, सदा रहे आनन्द.... आदि देव जय-जय गणनायक। विघ्न विनाशक-सिद्धि विनायक। सबको देते फल शुभदायक! मैं अबोध अनुचर अनुगायक! कृपा कर...

Vinayak Samadhan: जलपान, स्तनपान, मद्यपान, धूम्रपान.....आपस का शगल.....

Vinayak Samadhan: जलपान, स्तनपान, मद्यपान, धूम्रपान.....आपस का शगल.....: जलपान, स्तनपान, मद्यपान, धूम्रपान.....आपस का शगल....जलपान रोज़मर्रा की घटना..व्यवहार बढ़ाने का रास्ता....स्तनपान जैसे अमृत-पान....हर स्तनध...