33 कोटि पूण्य-आत्माओं का जन्म.....महामृत्युंजयस्तोत्रम् का स्वत:
उद्गम.....स्वमेव उद्गार.....ॐ से लेकर स्वस्तिक चिन्ह तक......शुद्धता की
कसौटी मात्र प्रतिशत (%) में.....बिंदु रूपी चौराहे से लेकर रेखाओं रूपी
रास्तों तक.....सम्पूर्ण धर्म का आव्हान...आस्था एक अन्तरंग ज्ञान है ,
प्रमाण से परे....कोसो दूर.... "उत्सव आमार जाति, आनंद आमार गोत्र”.....
Monday, 17 April 2017
हर हर महादेव....ॐ नम: शिवाय.....सहज या संकल्पित...WHATEVER....परन्तु
अनिवार्य.....अंदाज़ अपना-अपना....उच्च, समकक्ष, निम्न....और मुश्किल को
आसान करने के लिए....एक ही सामान्य आसान उपाय....बारम्बार...‘करत-करत
अभ्यास के जङमति होत “सुजान”.....
Happiness comes when you believe in what you are doing,
know what you are doing, and love what you are doing......SIMPLE..
Happiness comes when you believe in what you are doing,
know what you are doing, and love what you are doing......SIMPLE..
विज्ञापन में शुल्क का उल्लेख न हो तो दो ही संभावनाये....या तो
निःशुल्क....या फिर मनमर्जी... समस्त पोस्ट मानक-स्तर पर है...बस थोड़ी से
गहराई तक जाने की गुजारिश है....घाट-स्नान (Outdoor open BATH) का यही
कायदा है....और समस्त पत्र-रूपी चर्चा का एक ही उद्देश्य 'कायदे की बात,
फायदे की बात'....सिर्फ सकारात्मक.... Like a Good NEWS....मन को खट्टा
करने वाली बात को हवा में उड़ाने की कोशिश....सोशल-मीडिया पर धुंआ और अफवाह
उड़ाने वाली बात नही...फैलने के चक्कर में सिमटने की बात नही...आनंद को संक्षेप
में कैद करने की कोशिश नहीं...दुनिया में कुछ भी फ्री नहीं है...लेकिन
फ्री में उपलब्ध उपाय करना पड़ता है...कहने, सहने और रहने के लिए.....मन की
चंचलता को सिर्फ और सिर्फ सादगी से ही संतुष्टि मिलती है....आखिर चाँदनी
चार दिन की....आँखे चौधियाँ जाये तो अगले एक पल में कुछ नही सूझता है...और
इस बात इनकार नही कि इस पल में अस्तित्व जूझता है....दुनिया की सबसे खराब
आदत बोर होने की हो सकती है....मनोरंजन की बानगी या खुश रहने की कला....एक
व्यापारी मित्र ने बताया कि मंडी के हम्माल बात कर रहे थे कि आजकल मोदी और
योगी के कारण पेपर और टीवी देखने में मजा आ रहा है....और समाचार यह है कि
बड़े-बड़ो से हाथ मिला लिया, पर हकीकत में मज़ा तो बच्चों के बीच ही आता
है....यही समन्दर, यही Beach...यह तो सुकून कि यही "खरा-सोना"...वर्ना 'यह
दुनिया पित्तल दी'....बात चमकने की होती है तो इन दौनो से ज्यादा ताकत सूरज
की....भला आमना-सामना भी संभव नहीं ?....खुद को खुश करने के लिए हम वह सब
कुछ करने को तैयार रहते है जो मन को भा जाये...और मन का ईलाज करने के लिए
खुद को हक़ीम-लुकमान की जगह सरल-संत स्वीकार करना पड़ता है...कहते है लुकमान
जी वनस्पति से बात करते थे तथा लेकिन संत स्वयं कहता है....सरल बात तो किसी
से भी की जा सकती है....जैसे सब्जी-भाजी बेचने वाला वजन के बराबर पत्थर से
पूछ कर उतने ही वजन की सब्जी का तौल-मौल करता रहता है....हर काम step by
step होता है, जिसको समस्त steps की जानकारी हो जाती है वह एक्सपर्ट में
शुमार हो जाता है..वड़ा-प्रधान नी मन नी वात....भविष्यफल में जो लिखा होता
है, आदमी अपने अनुभव से तस्दीक करता है...nil या null....यह रिपोर्ट भी
सकारात्मक हो सकती है...जो यह कहती है...थोड़ा है, थोड़े की जरुरत है....या
फिर जो प्राप्त है, वही पर्याप्त है....या फिर नहीं है तो मेहनत से रेहमत
भी मिल जाती है....इस आधार पर कि कोई पूछ ले कि स्टॉक में कितनी Sleeping
Tablets है तो जवाब हो.....nil या null... YES, you may check....
Whenever, WHEREVER....FOREVER.....प्रणाम....सब मित्रों के बीच बैठ कर
"रघुपति राघव" गाने का आनन्द....मात्र स्वयं का
अनुभव...शत-प्रतिशत.....सम्पूर्ण सिद्धि का एक मात्र मुख्य विनायक
आधार--'गुरु कृपा हि केवलम्'......”#विनायक-समाधान#” @ #91654-18344#.
सत्य-कथा...मनोहर-कहानी....एक सुतार मित्र से चर्चा का मौका आया...नशे के
आदि उस मित्र ने शराब से बचने के लिए डॉक्टरी सलाह से नींद की गोली लेना
शुरू कर दिया और त्रयीका 0.5 को दिन में लेना शुरू कर दिया...और नशे में
अपनी कारीगरी के हुनर शुरू कर दिया...तब यह ध्यान में रखते हुए कि किसी भी
प्रकार का नशा...हर एक पौष्टिक पहलु का नाश करता है....और शुरू करने के
चक्कर में अंत शीघ्रता से आ जाता है....The TRAIN before time....नशा करने
वाला उदार है तो दया का पात्र है और नशा करने वाला हिंसक हो
जाये तो सर्वप्रथम स्वयं का नाश हो सकता है....इससे बढ़ कर कोई मशविरा
नहीं....मुशायरे के नशे में जागरण का बहाना चलेगा...लेकिन नींद में खलल
खर्राटों से भी हो सकती है.....नशे का निर्माण होने से पहले उसकी खपत का
समय निर्धारित हो जाना चाहिए....'मुनासिब-समय'...और जो समय को 'मुताबिक' कर
लेता है, शायद उसका नाम सिकन्दर हो सकता है...तब आमने-सामने दोनो...नाम
पूछने वाला और नाम बताने वाला....आप किसी से नाम पूछते है तो अपना नाम
बताने का सुअवसर आ जाता है....और नाम में बहुत कुछ....चर्चा और पर्चा
साथ-साथ....आखिर सत्य यही कि...राम से बड़ा राम का नाम....
दुनिया में ऐशो-आराम के इतने साधन है कि एक पल सरल आदमी को लगता है कि वह
सचमुच में उन्नति और आनंद से परे है किंतु आपाधापी के खेल में सुकून सिर्फ
सरल आदमी के भाग्य में होता है...बस खुद के हालात, खुद के इल्म में आना
चाहिए....कोई हर तरफ से मसलों से घिरा होता है तो यह ईच्छा होती है कि किसी
तरह निजात पा लिया जाये....इरादों को अमली जामा पहनाने के लिए बेशुमार
मौके मयस्सर होते है......हार्दिक स्वागत....यथा संभव आपके अनुरूप करने की
कोशिश तथा होने की प्रार्थना…विनायक समाधान @ 91654-18344…( INDORE /
UJJAIN / DEWAS )…
आखिर चाँदनी चार दिन की....आँखे चौधियाँ जाये तो अगले एक पल में कुछ नही
सूझता है...और इस बात इनकार नही कि इस पल में अस्तित्व जूझता है....दुनिया
की सबसे खराब आदत बोर होने की हो सकती है....मनोरंजन की बानगी या खुश रहने
की कला....एक व्यापारी मित्र ने बताया कि मंडी के हम्माल बात कर रहे थे कि
आजकल मोदी और योगी के कारण पेपर और टीवी देखने में मजा आ रहा है....और
समाचार यह है कि बड़े-बड़ो से हाथ मिला लिया, पर हकीकत में मज़ा तो बच्चों के
बीच ही आता है....यही समन्दर, यही Beach...यह तो सुकून कि यही
"खरा-सोना"...वर्ना 'यह दुनिया पित्तल दी'....
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