Monday, 17 April 2017

ठुमक-ठुमक चलत #रामचन्द्र बाजत पेजनियाँ... बधाईयाँ मर्यादा #पुरूषोत्म् के जन्मोत्सव की…श्री रामनवमी की हार्दिक बधाई
अनंत शुभकामनाएं……भगवान शिव जी के आराध्य देव प्रभु श्री अभिराम जी के जन्मोत्सव की हार्दिक शुभ कामनाएं…..
श्री राम ने सिखाया है संसार में सबसे बड़ा है वचन ... जिसने वचन का पालन किया बल, ज्ञान और अर्थ सब उसके अधीन हो जाते है….
“रघुकुल रीत सदा चली आयी प्राण जाये पर वचन न जाए”...
जा पर कृपा राम की होई
ता पर कृपा करें सब कोई……
लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं
राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् ।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं
श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये।।
भए प्रकट कृपाला... दिन दयाला... जय हो #दशरथ_नन्दन की.

किसी को खुश करने की कला....मात्र स्वयं का अनुभव.....एक दिन तो मिटटी में मिलना ही है….चलो जमीन पर ही बैठ बतियाते है…..और फिर यहाँ खालिस ज़मीन पर फर्श भी बिछा है…..हर एक का सपना....वतन का पतन ना हो.....मिलती रहेगी धुल, हवाओं के शोर में.....भले ही अनजान हस्तियाँ चाँदी सी चमक जाये....पर दामन में बदनामी भला किसे भली लग सकती है ?...राम इस देश का प्रभात का स्वर है….अर्थात इस देश की सुबह सदियों से इसी नाम से होती आ रही है…..बधाईयाँ मर्यादा #पुरूषोत्म् के जन्मोत्सव की…श्री रामनवमी की हार्दिक बधाई.....
मानस में कहा है…..
एहि महँ रघुपति नाम उदारा।
अति पावन पुरान श्रुति सारा ।।
मंगल भवन अमंगल हारी।
उमा सहित जेहि जपत पुरारी।।
करन चहउँ रघुपति गुन गाहा।
लघु मति मोरी चरित अवगाहा।।
सूझ न एकउ अंग उपाऊ।
मनमति रंक मनोरथ राऊ।।
..समय अपना-अपना....और आदान-प्रदान हो जाए....तो सहज आमने-सामने.....प्रणाम....सब मित्रों के बीच बैठ कर "रघुपति राघव" गाने का आनन्द....मात्र स्वयं का अनुभव.....हार्दिक स्वागतम…..”विनायक समाधान” @ 91654-18344...(INDORE/UJJAIN/DEWAS)...

#राम-राम सा#.....भगवान शिव जी के आराध्य देव प्रभु श्री अभिराम जी के जन्मोत्सव की हार्दिक शुभ कामनाएं…..जब तक #सूरज# , #चाँद# रहेगा....तब तक किसका नाम रहेगा ?....मालुम नहीं....पर #राम# से बड़ा #राम# का नाम...."राम की चिड़िया-राम का खेत"...
जा पर कृपा राम की होई
ता पर कृपा करें सब कोई….
ऐसा कहा जाता है कि #राम# नाम पापो का नाशक और मन को शांत करने वाला है...“राम-राम” के उच्चारण द्वारा हमें १०८ मनके की माला जपनें जैसा पुण्य प्राप्त होता है..अंक नौ(9-NINE)...सिद्ध-पूर्णांक....अक्षय वास्तव मे ऐसा है क्योकि मंत्र शास्त्र के अनुसार "रा" अग्नि का बीज मन्त्र है जो कि पापो को भस्म करने को अग्नि के सिद्धान्त पर काम करता है और इसी तरह "म" चन्द्र का जो मन को शीतल और शांत करके शान्ति देता है....हृदयरोग का इलाज विज्ञान के पास है, लेकिन ह्रदय में निहित ,ईर्ष्या, क्रोध, अभिमान इत्यादि दोषों का इलाज धर्म के पास है....धर्म का निर्वाह करने के लिए स्वयं के लिए बाध्यता नहीं कि हम कोई...पंडित, मौलवी, पादरी बने रहे....परन्तु आस्था का दावा अपने आप में किसी दवा से कम नहीं...आखिर आस्था जीवन का आधार है.....तब हम स्वय को सन्त के रूप में आत्मसात कर सकते है...यत्र-तत्र-सर्वत्र.....यह याद रखते हुए कि सन्त का अन्त कदापि नहीं….आदमी मुसाफिर है....आता है-जाता है.....कोई किसी के पास कुछ ही कारणों से आता-जाता है..भाव में, अभाव में या प्रभाव में....भाव में आया है तो प्रेम....अभाव में आया तो मदद....प्रभाव में आया तो प्रसन्न होना लाज़मी है कि प्रभु ने क्षमता दी है.....किसी को खुश करने की कला....मात्र स्वयं का अनुभव.......मात्र शब्दों का आदान-प्रदान.....विनायक क्रमचय-संचय....निरंतर...वर्ष 2007 से...एक दशक विश्वास का.....25000 से भी ज्यादा मित्रो से सहज “विनायक-वार्तालाप”......यह मानते हुए कि प्रत्येक मित्र निपुण होता है...निपुणता नामक गुण प्रत्येक को प्रकृति द्वारा प्रदत्त अनमोल...अनुपम...अमूल्य...अदभुत...उपहार होता है...जीवन की गति का अनुभव....COPY, PASTE & EDIT……तत्पश्चात......Save, Send, Publish....हार्दिक स्वागतम.....विनायक सामाधान @ 91654-18344.... इंदौर / उज्जैन / देवास...
वास्तविकता में कही गयी बात समस्या न हो कर मात्र अनुभव होता है...यदि अनुभव सुखद या लाभप्रद नहीं हो पाता है तो हम इसे समस्या करार देते है...और अनुभव निरन्तर सुखद या लाभप्रद नहीं हो पाता है तो हम इसे गम्भीर समस्या करार देते है...और यदि यह अनुभव लगातार जारी रहता है तो मस्तिष्क में नकारात्मक विचारो की उत्पत्ति शुरू हो जाती है...नकारात्मक विचारों से भय की उत्पत्ति संभव है...ठीक इसी प्रकार जब सुखद अनुभव होता है तो ....हम स्वयं स्वर्ग का अनुभव करते है क्याकि सकारात्मक विचार उतरोत्तर उन्नति का सशक्त अंग सिद्ध हुए है... सकारात्मक पहलु अमर होते हुए अनन्त तक जाने की सम्भावना रख सकता है...जहाँ तक विचारो की बात करते है तो यह मात्र मन की यात्रा होती है...निरन्तर यात्रा....ठहराव-प्रस्ताव का अधिकार मात्र शक्तिशाली मन को...निर्णय लेने की क्षमता ही मन की ताकत होती है....मन एक वृत रूपी परिधि है जहाँ विचार प्रकट होकर भ्रमण करते है जंहा अनन्त भी सहज परिभाषित है बिल्कुल वायुमंडल के परिदृश्य...यथा बीजम् तथा निष्पत्ति....एवम् नकारात्मक विचार की उत्पत्ति शीघ्रता से होती है....सकारात्मक से लगभग तीन गुना अधिक...और उपलब्ध सकारात्मक उर्जा के लिए लगभग पांच गुना हानिकारक....अर्थात कहावत सत्य चरितार्थ होती है... यदि स्थिति नियन्त्रण में नहीं हो तो एक अशुद्धि सम्पूर्ण सम्पूर्ण वायुमंडल के लिए हानिकारक हो सकती है.
हरिद्रा गणेश सिद्धि यन्त्र.......'Haridra Ganesh Yantra' is used for obtaining blessing of Deva Shree Ganesha for success in removal of obstacles & gaining of knowledge, wit, speech, writing power, money, protection, fame, power, position, success in Tantra. It is also used for removing malefic effects of ATMOSPHERE....अर्थात क्षमा, रक्षा, न्याय, व्यवस्था...अर्थात ऊर्जा का संचय...अर्थात साक्षात् "ईशान"…जिस प्रकार सम्पूर्ण सम्पूर्ण पृथ्वी पर लगभग 70% जल तथा 30% भूमि है, उसी प्रकार सम्पूर्ण वायुमंडल में भी 70% सकारात्मक तथा मात्र 30% नकारात्मक उपस्थित मान सकते है...ठीक जैसे 'खेत में खरपतवार'....और गणित के खेत में लेश-मात्र....नगण्य खरपतवार.....सौ की सौ मुद्राएँ.....स्वयं की....यदि सवाल का उत्तर सही हो तो....24 कैरेट GOLD.....जितने का आनन्द.....स्वच्छ आदान-प्रदान.....साबुत.....टूट-फुट नहीं.....साधारण कच्ची मिटटी की जमींन पर मालवा में बच्चे कन्चे (कांच की गोलियाँ) खेलते है.....और कंचो से बच्चे खेल-खेल में....गणना सिख जाते है...भारतीय संस्कृति......सभ्यता एवं राष्ट्र भक्ति के साथ-साथ स्वर्णिम राष्ट्र निर्माण के लिये संकल्पित ....... कुछ शब्द प्रत्येक या किसी भी धर्म या समुदाय या सम्प्रदाय का हिस्सा हो सकते है, उदाहरण....राज्यपक्ष, जड़त्व, युग्म, नाद, पंच-भोजन, पंच-स्वर, श्रवण, कीर्तन, चिन्तन, मनन, वायुमंडल, कालखण्ड, पंचतत्व, परकोटा, प्रवाह, स्थिरता, प्रहर, आहार, विहार, भ्रमण, ज्ञानेन्द्रिया, गुरु, आकर्षण, मौन, त्याग, दर्शन, सहज. सफल, सुफल, प्रार्थना.स्त्रोत, मध्य केन्द्र, उर्जा, शक्ति, वनस्पति, आसन, आश्रम, ध्यान, रेखाए, ईशान कोण, इत्यादि.....और इनका मूल्य भला कैसे तय हो सकता है ?.... .प्रणाम....सब मित्रों के बीच बैठ कर "रघुपति राघव" गाने का आनन्द....मात्र स्वयं का अनुभव.....हार्दिक स्वागतम…..”विनायक समाधान” @ 91654-18344...(INDORE/UJJAIN/DEWAS).

इस 'प्रण' के साथ कि 'प्रमाण' में 'प्राण' बसे...Just Because Of You...."अणु में अवशेष"..उपस्तिथि में 'पंच-तत्व'....गवाही में 'ज्ञानेन्द्रियाँ'...और सम्पूर्ण प्रक्रिया में ऊपर वाले को साक्षी या हाजिर-नाजिर माना जाता है...तब कोई पूछ ले कि कौन है वह ? तब क्या हो...….#कब ?, #क्यों ?, #कैसे ?...सबको मालुम है....कुछ-कुछ, बहुत-कुछ, सब-कुछ…….सब मित्रों के बीच बैठ कर "रघुपति राघव" गाने का आनन्द....मात्र स्वयं का अनुभव......#LIVE#.....From the desk of #VINAYAKSAMADHAN#....We are the #WORDS#.....वह #चर्चा# रूपी साहित्य, जो मित्रो के साथ साझा हुई....पढने की शुरुआत या प्रारम्भ, अन्त से भी कर सकते है...अभिनव-प्रयोग....उल्टा-पुल्टा स्वतः सीधा-सीधा....कही से भी पकड़ कर जहाँ भी छोड़े, वायुमंडल स्वयं के इर्दगिर्द.... स्वयं सिद्ध करे....याद रखने की जरुरत नहीं.... सरल-सूत्र.....#तन+मन+धन#.....#33+33+33=99#.....#तीन रेखाओं का खेल#......#पूर्णत: सात्विक#.....एकान्त का सार्वजानिक प्रदर्शन…..”#विनायक-समाधान#” @ #91654-18344#...#vinayaksamadhan# #INDORE#/#UJJAIN#/#DEWAS#..

હર હર મહાદેવ......ज्ञान की गंगा......शिवत्व में समर्पण का समावेश....."सत्यम-शिवम्-सुंदरम" की अनुभूति.... सुनिश्चिंत परम-आनन्द......चर्चा अन्त की ना हो कर, सन्त की हो...अनन्त की हो... एकांत की हो....बसंत की हो...समस्त सागरों के पानी की स्याही....समस्त जंगलों के पेड़ो की कलम....और सम्पूर्ण धरती मात्र एक कागज़ के समान....पर्याप्त है या नहीं ???....यह तो लिखने वाला ही जाने....इस अनुभव, आभास या अनुभूति के साथ......ईश्वर देवताओं का भी देवता है और इसीलिए वह महादेव कहलाता है...शब्द से चित्र बनते है ? या चित्र शब्द को उत्पन्न करता है ?..